Generation of Cellular Phone

Generation of Cellular Phone
Cellular phone 


Network नेटवर्क - 

IG तकनीक विकास के मामले में अपनी पूर्ववर्ती पीढ़ियों से इस अर्थ में भिन्न थी कि इसमें सेल साइट्स की विविधता , कॉल को एक जगह से दूसरी जगह स्थानान्तरण की सुविधा और चलते - फिरते बातचीत करने की नई तकनीकी व्यवस्था बन चुकी थी। इस तकनीक की प्रथम ऑटोमैटिक सेल्युलर नेटवर्क 1979 में जापान की NIT कंपनी द्वारा लांच किया गया । यह नेटवर्क टोक्यो शहर के 20 मिलियन से अधिक निवासियों तक पहुँचा। इसमें 23 नेटवर्क स्टेशन थे। पाँच वर्षों के उपरान्त ही इस नेटवर्क ने समूचे जापान में अपनी जगह बना ली और पहला आई.जी. नेटवर्क के नाम से प्रसिद्ध हुआ। दूसरा आई.जी. नेटवर्क जिसे नोर्डिक मोबाइल फोन कहा जाता है। 1981 में नार्वे, डेनमार्क, फिनलैंड एवं स्वीडन जैसे देशों में लांच हुआ । NMT पहला मोबाइल फोन नेटवर्क है जिसने अन्तर्राष्ट्रीय रोमिंग सुविधा उपलब्ध कराई। स्वीडिश इंजीनियर आस्टेन नैकिटैलो को इस नेटवर्क का जनक माना जाता है। 01 जनवरी , 1985 में यू.के. ने पहला फोटो - फोन बनाया । 

 1.First Generation प्रथम पीढ़ी -

के अस्तित्व में आने के बाद अनेक ट्रांसमीशंस पॉवर वाले मोबाइल फोन प्रयुक्त होने लगे क्रमशः सेल के आकार - प्रकार एवं क्षेत्रों में विस्तार होने लगा । प्रसारण की गति निश्चित होने , नये - नये सेलों का निर्माण परिणाम की अधिकता , छोटे सेल की क्षमता में वृद्धि आदि कुछ ऐसे महत्वपूर्ण घटक हैं , जिनके द्वारा मोबाइल फोन के इतिहास में प्रथम पीढ़ी ने विकास के नये कीर्तिमान स्थापित किये ।

2. Second Generation (द्वितीय पीढ़ी)- 

डिजिटल नेटवर्क (2G) - सन् 1990 में मोबाइल की द्वितीय पीढ़ी अर्थात् जी (2 जी) नेटवर्क अस्तित्व में आया। यह पद्धति पूर्णतः जीएसएम स्तर के प्रयोग पर निर्भर थी। 2 जी पीढ़ी में सबसे महत्वपूर्ण खोज प्रीपेड मोबाइल फोन है जिसे वर्तमान समय की उपलब्धि माना जा सकता है। 1991 ई. में फिनलैण्ड ने जीएसएम (रेडियोलिंजा) नेटवर्क का प्रचलन किया। यह पद्धति अमेरीका की अपेक्षा यूरोप में ज्यादा विकसित हुई ।

50 तृतीय वर्ष 2022 2G पद्धति वृहद वृक फोन की अपेक्षा बहुत ही छोटा लगभग 100-200 ग्रा. का सम्मिश्रण के कारण प्रभाव क्षेत्र एवं प्रभुत्व विस्तार की दृष्टि से अनेक संभावनायें हैं। द्वितीय डिजिटल पीढ़ी ने संचार के एक सर्वथा नये रूप को विकसित किया जिसे एस. एम. एस. अथवा टेक्स्ट मैसेजिंग कहते हैं। पहले एस. एम. एस. केवल जीएनएस. नेटवर्क पर ही उपलब्ध था लेकिन क्रमशः यह अपना विस्तार करते हुये सभी डिजिटल नेटवर्क्स से संबद्ध हो गया। 3 दिसम्बर, सन् 1992 को पहली बार एम. एस. एस. मशीन के जरिये संदेश प्रेषित किया गया। 1993 में क्रमशः इस प्रणाली ने फिनलैंड के अधिकांश शहरों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

     इसने मोबाइल फोन पर ऐक्सेस मीडिया कन्टेन्ट उपलब्ध कराने में अपनी मौलिकता प्रदर्शित की । 1998 में डाउनलोड से युक्त मोबाइल फोन ने रिंग टोन के कारण अत्यधिक लोकप्रियता हासिल की रिंगटोन को सबसे पहले फिनलैंड रेडियोलिंजा ( जिसे अब एलिसा कहा जाता है ) के माध्यम से आविष्कार किया गया । मोबाइल फोन पर विज्ञापन की प्रक्रिया सन् 2000 में फिनलैंड द्वारा प्रारम्भ की गयी । स्वीडन और फिनलैंड में ही वेडिंग मशीन एवं कार - पार्किंग कोकाकोला के जरिये मोबाइल सेवा की दरें निश्चित की गयीं । 1999 में नार्वे ने इसे व्यावसायिक रूप से लांच किया । इसी वर्ष फिलीपाइन्स में मिकि बैंक एवं क्रेडिट कार्ड्स द्वारा पेमेंट सिस्टम की शुरूआत हुई । यह शुरूआत मुख्यतः ग्लोब और स्मार्ट नामक मोबाइल आपरेटरों द्वारा की गयी । जापान में पहली बार इंटरनेट मोबाइल सेवा द्वारा प्रारम्भ की गयी । 

3. Third Generation (3G) High Speed IP Data Network (तृतीय पीढ़ी (3G) हाई स्पीड आईपी डाटा नेटवर्क)- 

2G नेटवर्क की अत्यधिक लोकप्रियता एवं प्रयोग दक्षता के फलस्वरूप इसका उपयोग अब दैनिक जीवन - चर्या में शामिल हो गया। लोगों का रुझान डाटा सेवाओं , विशेष रूप से नेट में एक्सेस , के प्रति ज्यादा होने लगा । डाटा सेवाओं का रोजगार से क्रमशः संबंद्ध होने की प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा तेज एवं प्रभूत मात्रा में डाटा स्पीड्स की आवश्यकता महसूस की जाने लगी। 2G की तकनीक रोजगारपरक नहीं थी इसलिये इंडस्ट्री ने अगली पीढ़ी यानी 3 जी तकनीक पर कार्य करना प्रारम्भ किया। 2G और 3G में तकनीक में मूलभूत अंतर यह है कि डॉटा ट्रांसमिशन की दृष्टि से 2G में सर्किट स्विचिंग थी जबकि 3G पैकेटस्विचिंग प्रयोग पद्धति पर आधारित है। 

      3G का प्रथम वाणिज्यिक नेटवर्क सन् 2001 में जापान की राजधानी टोक्यो में NIT - DOCOMO कंपनी द्वारा प्रारम्भ किया गया। इसमें WCDMA तकनीक प्रयुक्त की गयी। सन् 2002 में साउथ कोरिया ने CDMA 2000 IxEV - Do नामक नई तकनीक विकसित की । यूरोप के इटली और यू.के. द्वारा सन् 2003 में WCDMA - 2003 तकनीक के द्वारा 3G को लांच किया गया ।

    3G तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता औद्योगिक घटकों में पारदर्शिता लाने पर निर्भ थी। इस मोबाइल में पाठ संदेश भेजने और आवाज फोन फीचर के अलावा कई फीचर होते जैसे- कॉल रजिस्टर (GPS) नेविगेशन , संगीत (MP3) और वीडियो (MP4) प्लेबैक आर. डी. एस. रेडियो रिसीवर, अलार्म, ज्ञापन और दस्तावेज रिकार्डिंग, निजी आयोज और व्यक्तिगत डिजिटल सहायक प्रकार्य, स्ट्रीलिंग वीडियो देखने की क्षमता या बाद में देख के लिये वीडियो डाउनलोड, वीडियो कॉलिंग, निर्मित कैमरे (3,2 MPX ) और कोर्ड (वीडियो रिकार्डिंग, ऑटोफोकस (फ्लैश के साथ) रिंगटोन, खेल, पट, स्मृति।

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