| Computer networki |
कंप्यूटर नेटवर्क से आज से कंप्यूटर और उससे जुड़े हुए उपकरणों के ऐसे समूह से है जिन से सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। इसके द्वारा सूचनाएं इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रेषित अथवा प्राप्त की जा सकती हैं। कंप्यूटर नेटवर्क करके अंतर्गत एक ही स्थान पर कार्य कर रहे अथवा दूसरे स्थान पर कार्य कर रहे स्वतंत्र (Autonomous) कंप्यूटरों तथा अन्य इकाइयों जैसे प्रिंटर, सरवर, प्लॉटर आदि को संचार माध्यम के द्वारा जोड़ा जा सकता है, जिससे ये सभी आपस में संसाधनों एवं सूचनाओं का सादा उपयोग करती हैं।
सामान्यतः कंप्यूटर नेटवर्क में कंप्यूटर एवं इंटेलिजेंट पेरिफेरल उपकरण (Intelligent) टेलीफोन लाइन, माइक्रोवेव रिले या अन्य तीव्र गति के संचार माध्यमों (Links) द्वारा जुड़े होते हैं, जिससे आपस में डाटा संप्रेषण एवं संसाधनों का मिलाजुला प्रयोग किया जा सके। यह नेटवर्किंग बहुत छोटे स्थानीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक विस्तृत हो सकती है।
| LAN WAN AND MEN |
नेटवर्क के प्रकार Types Of Network
नेटवर्क निम्न तीन प्रकार का हो सकता है -
1.LAN( Local Area Network)-
LAN एक ऐसा नेटवर्क है, जो स्थानीय स्तर पर बहुत से कंप्यूटर हो या वर्क स्टेशनों पर इंटरों व अन्य उपकरणों को आपस में जोड़ता है, जिससे उसमें सूचनाओं एवं डाटा का आदान-प्रदान हो सके। LAN के माध्यम से विभिन्न उपकरणों और संसाधनों का साझा उपयोग तथा परस्पर संबंध उपयोगिता ओं के माध्य सूचना /फाइल आदि का विनियोग किया जा सकता है। वर्तमान में लेन का उपयोग बहुत अधिक लोकप्रिय हो गया है, क्योंकि इसमें सॉफ्टवेयर, सूचना, डाटा व उपकरणों का सांझा उपयोग संभव है। इसका उपयोग व्यवसाय संगठन आंतरिक रूप से सूचनाओं के आदान-प्रदान में करते हैं। इसका भौगोलिक क्षेत्र सामान्यतः 1 से 10 किलोमीटर तक होता है। इस प्रकार LAN एक एसी सूचना संप्रेषण व्यवस्था है जिसमें अलग-अलग प्रकार के विभिन्न उपयोगकर्ता सीमित भौगोलिक दायरे में उच्च गति पर सूचनाओं का आदान प्रदान कर सकते हैं।
LAN लैंड में सीमित भौगोलिक क्षेत्र में परस्पर संबंध वर्क स्टेशनों द्वारा एक सरवर पर उपलब्ध संसाधनों का साझा उपयोग किया जाता है। जिसमें ऐसे व्यवसायिक संगठनों जो सीमित भौगोलिक क्षेत्र में स्थित हो, जैसे कॉलेज, व्यवसायिक कार्यालय के विभिन्न कंप्यूटरों, व अन्य उपकरणों जैसे प्रिंटर, प्लॉटर आदि को, केवल या ऑप्टिक फाइबर द्वारा स्थाई रूप से आपस में जोड़ दिया जाता है। इस नेटवर्क में पर्सनल कंप्यूटर भी हो सकते हैं, और बहुउपयोगकर्ता एवं बहुकार्यों वर्क बर्कस्टेशन भी हो सकते हैं। सरवर द्वारा सभी वर्कस्टेशनों को उनकी आवश्यकता अनुसार सूचना भंडारण, सूचना एक्सेस करना, प्रिंट सुविधा, बाहरी संचार सुविधा आदि विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करवाई जाती है।
LAN के किसी दूसरे LAN अथवा WAN को एक्सेस (Access) किया जा सकता है। किन्हीं दो मिले-जुले आर्किटेक्चर वाले LAN को ब्रिज (Bridges) के माध्यम से तथा अलग-अलग आर्किटेक्चर वाले LAN को गेटवे ( Gateways) के द्वारा जोड़ा जाता है।
LAN की विशेषताएं
(i)प्रेषण माध्यमों का सभी उपयोगकर्ताओं द्वारा उपयोग।
(ii)कम लागत वाले संचार उपकरणों का उपयोग
(iii)सीमित भौगोलिक क्षेत्र।
(iv)उच्च डाटा स्थानांतरण दर (सामान्यतः 1 MBPS to MBPS),
(v)डाटा एवं संसाधनों का साझा उपयोग।
(vi)नेटवर्क के विभिन्न वर्ग स्टेशनों के माध्य आसान संचार सुविधा।
(vii)नेटवर्कर का विस्तार करना आसान।
(viii)WAN की तुलना में कम लागत।
(x)कंप्यूटर त्रुटि दर।
LAN के लाभ
(i) LAN मैं किसी भी नोड (Nodes) को एक्सेस (Access) किया जा सकता है। अतः सुरक्षा के लिए उपयुक्त सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है।
(ii) अकेले कंप्यूटर की तुलना में LAN के कई कंप्यूटरों का रखरखाव अपेक्षाकृत कठिन है।
(iii)LAN मैं सरवर के साथ नोड्स (Nodes) के कंप्यूटरों के पास भी मेमोरी रखनी होती है अतः ज्यादा मेमोरी की आवश्यकता ।
LAN मे एक्सेस की विधियां-
LAN में एक्सेस हेतु दो तकनीकों का प्रयोग किया जाता है-
(i)CSMA/CD -
इसका उपयोग बस नेटवर्क (Bus Network) के साथ किया जाता है। बस मल्टीपल एक्सेस मोड में काम करती है। इस विधि में नोट द्वारा डेटा संप्रेषण करते समय यह सुनिश्चित करना होता है कि उस समय नेटवर्क में ट्रैफिक नहीं हो, अन्यथा डेटा भिंडत (Data Collision) का डर बना रहता है इसलिए Multiple Access With Collision Detection इसके लिए विधि काम में ली जाती है। प्रत्येक डेटा संप्रेषित करने वाले नोडस द्वारा पुन: डेटा को प्राप्त करके macth किया जाता है। यदि इस में कोई अंतर आता है, तू है Collision को प्रदर्शित करता है। ऐसी दशा में नोट एक छोटे रेंडम समय अंतराल के बाद डाटा को पुनः प्रेषित कर देता है जिससे Collision की आशंका कम हो जाती है।
(ii) टोकन पासिंग (Token Passing)-
इस विधि में डेटा संप्रेषण के लिए एक नोट में से दूसरे नोट तक टोकन पास किया जाता है। टोकन से आशय डेटा बिट्स के समूह से है जो निश्चित क्रम के आधार पर एक नोट से दूसरे नोड्स तक संचालित होता है यह टोकन रिंग में घूमता है। पूरे नेटवर्क मैं एक ही टोकन होता है, तथा कोई भी नोट तभी डेटा संप्रेषण कर सकता है जबकि उसके पास टोकन हो। अतः एक समय में एक ही लोड डाटा संप्रेषित कर सकता है। इससे डेटा भिंडित की समस्या नहीं रहती है।
2.MAN (Metropolitan Area Network)-
MAN ऐसी नेटवर्कर को व्यक्त करता है जिसकी भौगोलिक सीमा एक महानगरीय क्षेत्र तक विस्तृत हो। यह क्षेत्र के स्थानीय नेटवर्क को परस्पर जोड़ता है। यह मूलत:LAN का विस्तृत स्वरूप है जिसम सामान्यतः LAN की तकनीक काम में ली जाती है। यह एक शहर में स्थित विभिन्न व्यवसाय ग्रहों एवं अन्य स्थलों के मध्य संबंध स्थापित करता है। यह निजी एवं सार्वजनिक दोनों प्रकार का हो सकता है।MAN मैं संप्रेषण हेतु फाइबर ऑप्टिक तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इसमें विभिन्न नोड्स या वर्क स्टेशनों के बीच उच्च हस्तांतरण दर पर डाटा संप्रेषित होता है। MAN के अंतर्गत डाटा और ध्वनि दोनों का संप्रेषण होता है।
MAN प्रमुखत: केवल टेलीविजन नेटवर्क और सेल्यूलर फोन में काम आता है इसमें मात्र एक अथवा दो केबल होते हैं और कोई स्विचिंग तंत्र नहीं होता।
3.WAN( Wide Area Network)-
MAN दूरस्थ भौगोलिक क्षेत्रों के कंप्यूटरों को जोड़ने वाला नेटवर्क है। इसके अंतर्गत दो या दो से अधिक को भी जोड़ा जाता है। WAN एक विषम (Heterogeneous) प्रकार का नेटवर्क है, जिसमें बहुत से कंप्यूटर केवल, टेलीफोन लाइन, माइक्रोवेव, सेटेलाइट, ऑप्टिकल फाइबर आदि जुड़े रहते हैं। यह सभी नेटवर्क को समान रूप से मॉडेम की सहायता से एक्सेस करते हैं। इंटरनेट सबसे बड़ा वाइड एरिया नेटवर्क है, जिसमें कई नेटवर्क को एवं गेटवे (Gateways) द्वारा लाखों कंप्यूटर्स जुड़े हुए हैं।
कंप्यूटर संचार एवं नेटवर्क -
WAN के प्रमुख लक्षण
(i)विषम प्रकार के विरुद्ध कंप्यूटर्स एक नेटवर्क का बहुत बड़ी भोगौलिक चित्र में पहला नेटवर्क।
(ii)विभिन्न उपयोगकर्ताओं को सामान्यतः एक तीसरे सेवा प्रदाता (जैसे सेटेलाइट, कैरियर, टेलीफोन कंपनी आदि) द्वारा परस्पर संबंध किया जाता है।
(iii)डेटा स्थानांतरण दर अपेक्षाकृत कम (1 MBPS) से कम।
(vi)त्रुटि दर अपेक्षाकृत अधिक।
WAN प्रोटोकॉल-
असमान उपकरण (Devices) परस्पर तब तक संप्रेषण नहीं कर सकते जब तक कि उसके द्वारा कुछ निर्धारित मापदंडों के अनुरूप कार्य न किया जाए। इन मापदंडों को सामान्यतः प्रोटोकॉल संबोधित किया जाता है। प्रोटोकॉल उन नियमों का समूह है, जो प्रेषक एवं प्रेषित उपकरणों के माध्यम संप्रेषण को व्यवस्थित करता है। सामान्यतः WAN में इन दो प्रोटोकॉल्स का उपयोग किया जाता है-
(i)X.25 -
यह PPSN (Public Packet Switched Network) का प्रोटोकॉल है। इसका विकास ITTCC (Internhational Telegraph And Telephones Consulative Cojmmi) द्वारा DTE (Data Terminal Equipment) एवं DCTE (Data Circuit Terminating Equipment) को जोड़ने के लिए किया जाता है।
(ii)EDI (X.12 AND EDIFACT )-
इलेक्ट्रॉनिक डेटा एक्सचेंज(Electronic Data Exchange) हेतु कई प्रोटोकॉल अस्तित्व में है। X.12 EDI प्रोटोकॉल विश्व में कई संगठनों द्वारा प्रयुक्त किया जा रहा है, पर EDI का एक अन्य प्रोटोकॉल EDIFACT मुख्यत: यूरोप में लोकप्रिय है।
WAN हार्डवेयर
WAN में प्रयुक्त होने वाले कुछ हार्डवेयर उपकरण इस प्रकार हैं -
(i) हॉस्ट (Host)-
WAN मैं नियंत्रक अथवा केंद्रीय कंप्यूटर को होस्ट (Host) कहा जाता है। यह नेटवर्क से जुड़े दूसरे कंप्यूटर्स को वे सेवाएं प्रदान करता है, जो नेटवर्क के द्वारा प्राप्त की जा सकती है। WAN मैं यह सामान्यतः एक बड़ा मेनफ्रेम कंप्यूटर होता है। बड़े WANs में एकाधिक मेनफ्रेम या मिनीकंप्यूटर्स होस्ट (Host) की तरह कार्य करते हैं। होस्ट द्वारा उपभोक्ताओं को एप्लीकेशन प्रोग्राम एवं डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम को एक्सेस करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
(ii)Front-End Procesdor -
कंप्यूटर की कार्य प्रणाली में इनपुट आउटपुट का सबसे अधिक समय लेने वाली गतिविधियां है। होस्ट कंप्यूटर के समय को पूरी तरह डेटा प्रोसेसिंग हेतु बचाए रखने के लिए नेटवर्क के विभिन्न नोड्स एवं होस्ट कंप्यूटर के बीच में इन को लगा दिया जाता है। यह होस्ट कंप्यूटर के लिए इनपुट आउटपुट कार्यों का निष्पादन करते हैं।
(iii) कंट्रोलर्स (Controllers)-
कंट्रोलर अथवा नियंत्रक बिशेषीकृत कंप्यूटर हैं, जिन का कार्य होस्ट कंप्यूटर के लिए कम स्पीड वाले पेरीफेरल डिवाइसेज से संप्रेषण स्थापित करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। यह नेटवर्क के विभिन्न नोड्स के प्रेषित संदेश को व्यवस्थित करके प्रोसेसिंग हेतु होस्ट कंप्यूटर को भेजने तथा होस्ट कंप्यूटर से प्राप्त संदेश को पुनः प्रेषक नोडस तक भेजने का कार्य संपादित करते हैं। इन्हें टर्मिनल कंट्रोलर, क्लस्टर कंट्रोलर एवं कम्युनिकेशन कंट्रोलर के नाम से जाना जाता है।
(iv) मल्टीप्लैक्सर ( Multiplexers)-
यह WAN की संप्रेषण प्रणाली का एक हार्डवेयर उपकरण है, जो विभिन्न कम गति वाले उपकरणों को उच्च गति वाली संचार लाइनों के साथ उपयोग को संभव कराता है। मल्टीप्लैक्सर द्वारा नेटवर्क में संचार लाइन से होस्ट सीपीयू CPU पर डाटा प्रेषित किया जाने में प्रयुक्त साधनों पर नियंत्रण रखा जाता है। आजकल T- 1 मल्टीप्लैक्सर का प्रयोग उच्च क्षमता की डिजिटल लाइनों हेतु किया जा रहा है।
(v) कंसेंट्रेटर्स (Concentrators) -
यह एक हार्डवेयर उपकरण है, जो मल्टीप्लैक्सर एवं Controller को जोड़ने का कार्य करता है।
(vi) प्रोटोकॉल कन्वर्टर्स (Protocol Convertors)-
WAN एक विस्तृत क्षेत्र नेटवर्क है, जिसमें कई प्रकार के हनुमान तंत्र कंप्यूटर संप्रेषण माध्यम आदि कार्य करते हैं। ऐसे आसमान तंत्रों में संप्रेषण मापदंडों के कठोर निर्वाह के बिना नहीं हो सकता। इन्हीं संप्रेषण मापदंडों को प्रोटोकॉल कहा जाता है।
जब ये अलग-अलग प्रोटोकॉल वाले आसमान तंत्र आपस में संप्रेषण करना चाहते हैं, तो यह जरूरी हो जाता है कि प्रोटोकॉल परिवर्तन कर रहे इन्हें इसके लिए सक्षम बनाया जाए। हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर अथवा हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर के सहयोग से यह कार्य किया जाता है। इसे संपादित करने वाले उपकरण को प्रोटोकॉल कनवर्टर कहा जाता है।
नोट - इसके अतिरिक्त WAN हार्डवेयर में ब्रिज, रूटर और गेटवे भी शामिल हैं, जिनका वर्णन हम ऊपर कर चुके हैं।
नेटवर्किंग के लाभ Benefits Of Networking
1. संसाधनों का साझा उपयोग (Sharing Of Resources)-
नेटवर्किंग के अंतर्गत परस्पर संबंध कंप्यूटरों के पास उपलब्ध संसाधनों जैसे सूचना, डेटा, डिवाइसेज (प्रिंटर, सीडी, ड्राइव, प्लॉटर आदि) प्रोग्रामों आदि का साझा उपयोग किया जा सकता है। अतः महंगे एवं सीमित साधनों का आवश्यकताअनुसार साझा उपयोग नेटवर्किंग का एक महत्वपूर्ण लाभ है।
2. सूचना संप्रेषण (Data Transmission)-
नेटवर्क में जुड़े कंप्यूटर एक दूसरे से संप्रेषण कर सकते हैं। अतः केंद्रीकृत डेटाबेस अथवा अलग-अलग कंप्यूटरों पर उपलब्ध सूचनाओं को मैं एवं प्रयोग किया जा सकता है।
3. समानांतर एक्सेस (Simultaneous Access) -
इसके द्वारा केंद्रीकृत डेटाबेस का एक साथ कई उपयोगकर्ता उपयोग कर सकते हैं। यदि समान सॉफ्टवेयर की आवश्यकता हो तो उसका की विभिन्न उपयोगकर्ताओं द्वारा एक साथ उपयोग किया जाता है।
4. आसान बैक-अप सुविधा (Easy Backup)-
इसमें डाटा केंद्रीकृत सरवर के पास रहता है, अतः इसका नियमित रूप से अपडेशन संभव है। साथ ही यदि किसी एक स्थान पर किसी कारण समय विशेष पर डेटा अथवा कोई साधन उपलब्ध नहीं हो, तो दूसरे कंप्यूटर पर उपलब्ध सूचना एवं साधनों का प्रयोग किया जा सकता है। महत्वपूर्ण डेटा को एक से अधिक स्थानों पर संग्रहित करके उसकी सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकता है, जो निश्चित तौर पर संगठन की विश्वसनीयता में वृद्धि करेगा।
LAN एवं WAN में अंतर -
1.LAN का भौगोलिक डायरा कुछ किलोमीटर तक सीमित रहता है, जबकि WAN का दायरा दूरस्थ भौगोलिक क्षेत्रों तक रहता है।
2. डेटा स्थानांतरण की लागत LAN में नगण्य रहती है, क्योंकि संप्रेषण माध्यम पर उपयोगकर्ता का स्वामित्व रहता है, जबकि इसके विपरीत WAN में संप्रेषण माध्यम टेलीफोन लाइन, माइक्रोवेव, सेटेलाइट लिंक आदि होते हैं। अतः डाटा स्थानांतरण की लागत बहुत अधिक रहती है।
3.LAN मैं संप्रेषण करने वाली नोड्स के मध्य भौतिक दूरी कम होने के कारण संप्रेषित डेटा में त्रुटि कि आशंका कम रहती है, जबकि WAN में वह है दूरी बहुत अधिक हो जाने से त्रुटि दर भी बढ़ जाती है।
4. LAN मैं आमतौर पर सभी नोड्स आपस में तारों, कोएक्सियल केबल या ऑप्टिकल फाइबर द्वारा आपस में जुड़े रहते हैं,WAN परंतु मैं इस प्रकार का भौतिक संभव आवश्यक नहीं है।
5. एक नोड से दूसरे नोड तक डेटा हस्तांतरण की दर LAN में काफी अधिक (1- 100 Mbps) रहती है, जबकि WAN मैं यह दर अपेक्षाकृत बहुत कम (1800-9600 Bps) रहती है।

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