What is computer programming language and its types?

Computer mein Programming Language Kya hota hai | कंप्यूटर में प्रोग्रामिंग भाषा क्या होती है, 

Table Of Contents

    कंप्यूटर की अनेक भाषाएं हैं, जिनका प्रयोग हम कंप्यूटर से संबंध स्थापित करने के लिए करते हैं। जिस प्रकार मानव की विभिन्न भाषाओं के शब्द कोश तथा व्याकरण संबंधी नियम होते हैं, उसी प्रकार कंप्यूटर की भाषाओं के भी अपने शब्दकोश तथा नियम होते हैं। इन नियमों का प्रयोग करता था इनके शब्दकोश के शब्दों को एक विशेष क्रम में लगाकर, कमांड्स अर्थात निर्दोषों का निर्माण किया जाता है। कंप्यूटर के विकास के साथ ही, कंप्यूटर की विभिन्न भाषाओं का भी विकास हो रहा है।

        कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषाओं को, उनके विभिन्न गुणों के आधार पर, विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, 

    जो निम्न प्रकार है -

    What is computer programming language and its types?
    What is computer programming language and its types?


    1. निम्न स्तरीय भाषाएं या एल. एल. एल. (Low level Language (LLL)-

    इस प्रकार की भाषा में की जाने वाली प्रोग्रामिंग कंप्यूटर की स्मृति तथा सी.पी.यू. (CPU) में उपस्थित रजिस्टर के आधार पर की जाती है। हम जानते हैं कि एक कंप्यूटर की सरंचना (Architecture) दूसरे कंप्यूटर से भिन्न होती है, जिस कारण, अलग-अलग कंप्यूटर के लिए निम्न स्तरीय भाषा में लिखे गए अलग-अलग प्रोग्राम्स का प्रयोग किया जाता है। इन भाषाओं को ' मशीन आधारित भाषाएं (Machine Dependent Language)' भी कहते हैं। इस प्रकार की भाषा में प्रोग्रामिंग करने के लिए यह आवश्यक है, कि प्रोग्रामर को कंप्यूटर की सरंचना का समुचित ज्ञान हो। इस श्रेणी में दो भाषाएं आती हैं -

    (i) मशीनी भाषा(Machine Language)-

    इसको प्रथम पीढ़ी की भाषा भी कहते हैं। इस भाषा में बायनरी अंकों (0 या 1 ) के आधार पर प्रोग्रामिंग होती है। इसमें निर्देशों (Instruction), रजिस्टर्स, स्मृति लोकेशन Memory Location) व (Deta) डेटा को बाइनरी रूप में दिया जाता है। इस भाषा को, कंप्यूटर बिना किसी अनुवादक सॉफ्टवेयर (Translator Software) का प्रयोग किए, सरलता से समझ सकता है। इस भाषा में लिखें किसी भी प्रोग्राम को, सीधे ही कंप्यूटर द्वारा क्रियान्वित किया जाता है। मशीनी भाषा में लिखे निर्देश (Instruction) के दो भाग होते हैं -

    (a) ऑपरेशन पार्ट (Operation Part)-

    इसे OP - Code भी कहते हैं यह कंप्यूटर को यह बताता है कि उसे किस प्रकार का ऑपरेशन करना है।

    (b) एड्रेस पार्ट (Addres Part)-

    यह कंप्यूटर को यह बताता है कि ऑपरेशन (Operation) के लिए आवश्यक डाटा कहां से प्राप्त होगा तथा ऑपरेशन हो जाने के पश्चात परिणाम (Result) को, किस स्थान पर संग्रहीत करना है।

    मशीनी भाषा में लिखे प्रोग्राम, निम्नलिखित प्रकार से प्रदर्शित होते हैं -

    11001010110101001

    1100111101010111001

    उपर्युक्त प्रयोग किए गए शब्दों; जैसे - निर्देश, प्रोग्राम तथा सॉफ्टवेयर आदि की परिभाषाएं निम्नानुसार हैं -

    निर्देश (Instruction)-

    कंप्यूटर को, उसकी भाषा में, किसी कार्य को करने के लिए दिया जाने वाला आदेश या कमांड निर्देश कहलाता है।

    प्रोग्राम (Program)-

    किसी कार्य के लिए कंप्यूटर को दिए जाने वाले निर्देशों (Instruction) का समूह प्रोग्राम कहलाता है।

    सॉफ्टवेयर (Software)-

    किसी कार्य के लिए कंप्यूटर को दिए जाने वाले प्रोग्राम्स (Program) का समूह सॉफ्टवेयर कहलाता है।

    मशीनी भाषा के गुण (Merits Of Machine Language)-

    मशीनी भाषा के निम्नलिखित गुण होते हैं -

    (a) कंप्यूटर मशीनी भाषा को सीधा ही समझ सकता है, इसलिए इस भाषा में लिखे प्रोग्राम को क्रियान्वित करने के लिए अनुवादक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता नहीं होती है।

    (b) इस भाषा में अनुवाद सॉफ्टवेयर (Translator Software) की आवश्यकता नहीं होती है, तथा यह भाषा सीधे स्मृति लोकेशन वह रजिस्टर पर कार्य करने की सुविधा प्रदान करती है। इस भाषा में लिखे प्रोग्राम अधिक तीव्र गति से क्रियान्वित होते हैं।

    मशीनी भाषा के अवगुण (Demerits Of Machine Language) -

    मशीनी भाषा के प्रमुख अवगुण निम्नलिखित हैं - 

    (a) मशीन आधारित भाषा होना (Machine Dependent Language)-

    यह भाषा कंप्यूटर (Computer) की सरंचना पर निर्भर करती हैं, जिस कारण यह आवश्यक नहीं है कि एक प्रकार के कंप्यूटर पर सही तरीके से चल रहा प्रोग्राम, दूसरे प्रकार के कंप्यूटर पर भी सही प्रकार से ही चलेगा। इसी कारण, अलग-अलग कंप्यूटर्स के लिए, अलग-अलग प्रोग्राम देखने पड़ते हैं।

    (b) प्रोग्रामिंग में असुविधा (Difficulty In Programming)-

    मशीनी भाषा में निर्देशों (Instruction) 1 व 0 को के रूप में लिखा जाता है। अतः मशीनी भाषा में प्रोग्राम तैयार करना अत्यंत कठिन होता है।

    (c) गलतियों को खोजने व सुधारने में असुविधा (Difficulty In Searching And Correcting the Error)-

    मशीनी भाषा में लिखे प्रोग्राम में गलतियों को योजना तथा प्रोग्राम में परिवर्तन करना अत्यंत कठिन होता है।

    (d) कंप्यूटर की सरंचना का ज्ञान (Knowledged Of The Architecture Of Computer)-

    यह भाषा आधारित होती हैं। अतः यह अत्यंत आवश्यक है कि प्रोग्रामर को कंप्यूटर की सरंचना का पर्याप्त ज्ञान हो।

    Read more: कंप्यूटर में कितने प्रकार की मेमोरी होती है 

    (ii) असेंबली भाषा (Assembly Language)-

    इस भाषा को ' द्वितीय पीढ़ी की भाषा ' भी कहा जाता है। इस भाषा में मशीनी भाषा के बायनरी अंकों के स्थान पर वर्णमाला (Alphabet) तथा संख्यात्मक प्रतीकों Unmeric Symbols) का प्रयोग होता है। इस भाषा में कुछ फंक्शन (Functions), ऑपरेशन (Operation) व कोड (Code) के लिए प्रतिको (Symbols) या नामों का प्रयोग किया जाता है, Mnemonice जिसे कहते हैं। यह भाषा Macro बनाने व उसका प्रयोग करने की सुविधा भी प्रदान करती है। एक Macro के दो भाग होते हैं, जिसमें से एक Macro का नाम तथा दूसरा Macro की Body बॉडी होता है। इसमें विभिन्न प्रकार के निर्देश (Instruction) लिखे होते हैं। इस Macro का प्रयोग; हम आवश्यकता पड़ने पर कहीं भी कर सकते हैं। इस कारण एक ही कोड (Code) को; हमें बार-बार नहीं लिखना पड़ता है। असेंबली भाषा में लिखे निर्देश (Instruction) निम्नलिखित प्रकार होते हैं -

    ADD] = > Operation Code Part

    556]  = >   Address Part

    इसमें Add (Opration Code Part) कंप्यूटर को यह बताता है कि जोड़ (Addition) का ऑपरेशन (Opration)होना है तथा Address Part कंप्यूटर को यह बताता है कि इस Address  की Value का प्रयोग ऑपरेशन (Opration) में करना है। निर्देश (Instruction), कंप्यूटर को यह बताता है कि Memory Address 556 कि Value को Accumulator कि Value मैं जोड़ दो।

         हम जानते हैं कि कंप्यूटर केवल मशीनी भाषा ही समझता है। इस कारण हमें असेंबली भाषा में लिखी प्रोग्राम को मशीनी भाषा में बदलने की आवश्यकता पड़ती है। यह कार्य, असेंबलर नामक अनुवादक करता है। यह अनुवादक, असेंबली भाषा में लिखे प्रोग्राम को, मशीनी भाषा में बदलने का कार्य करता है। एक बार मशीनी भाषा में परिवर्तित होने के पश्चात ही प्रोग्राम का क्रियान्वयन संभव होता है।

    असेंबली भाषा के गुण (Demerits Of Assembly Language)-

    असेंबली भाषा के प्रमुख अवगुण निम्न प्रकार हैं -

    (a) असेंबली भाषा को कंप्यूटर नहीं समझ सकता है। अतः इस भाषा को असेंबलर द्वारा, मशीनी भाषा में बदलने की आवश्यकता होती है।

    (b) यह मशीन आधारित भाषा होती है। इसलिए इस भाषा में, एक प्रकार के कंप्यूटर के लिए लिखा प्रोग्राम अन्य प्रकार के कंप्यूटर पर क्रियान्वित नहीं किया जा सकता।

    (c) यह मशीन आधारित भाषा होती है, इसलिए यह आवश्यक है कि प्रोग्रामर को कंप्यूटर की सरंचना का पर्याप्त ज्ञान भी हो।

    असेंबली भाषा के अवगुण (Demerits Of Assembly Language)-

    असेंबली भाषा के प्रमुख अवगुण निम्न प्रकार है -

    (a) असेंबली भाषा को कंप्यूटर नहीं समझ सकता है। अत: इस भाषा को असेंबलर द्वारा मशीनी भाषा में बदलने की आवश्यकता होती है।

    (b) यह मशीन आधारित भाषा होती है। इसलिए इस भाषा में, एक प्रकार के कंप्यूटर के लिए लिखा प्रोग्राम अन्य प्रकार के कंप्यूटर पर क्रियान्वित नहीं किया जा सकता हैं।

    (C) यह मशीन आधारित भाषा होती है। इसलिए यह आवश्यक है। कि प्रोग्रामर को कंप्यूटर की सरंचना का पर्याप्त ज्ञान भी हो।


    2.उच्च स्तरीय भाषाएं या एच. एल. एल.(High Lavel Language)-

    उच्च स्तरीय भाषाओं का विकास निम्न स्तरीय भाषाओं पर आधारित प्रोग्रामिंग में आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए किया गया था। HLL मैं प्रोग्रामिंग करने के लिए यह आवश्यक नहीं था कि प्रोग्रामर को कंप्यूटर की सरंचना का पूर्ण रूप से ज्ञान हो। HLL मैं प्रोग्रामिंग करना, निम्न स्तरीय भाषा की तुलना में सरल है। 

           HLL के साथ एक समस्या यह है कि इस भाषा में लिखे गए प्रोग्राम को अनुवादक के द्वारा, मशीनी भाषा में परिवर्तित करने की आवश्यकता होती है। HLL को मशीनी भाषा में बदलने के लिए, इंटरप्रिंटर व कंपाइलर नाम के दो Translator उपस्थित होते हैं, जो विभिन्न गुणों के आधार पर एक दूसरे से अलग होते हैं।

     विभिन्न कोणों के आधार पर उच्च स्तरीय भाषा दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है -

    (i) समस्या आधारित भाषा (problems Oriented Language)-

    इस प्रकार की भाषाओं में समस्या के समाधान के विस्तृत वर्णन के स्थान पर परिणाम (Output) पर ध्यान देना होता है। इन भाषाओं में, समस्याओं को हल करने की पूर्व निर्मित विधियां संग्रहित रहती हैं।

    उनके उदाहरण हैं - FoxPro, Oracle, MS SQL आदि।

    (ii) प्रक्रिया आधारित भाषा (Procedure Oriented Language)-

    इस प्रकार की भाषाओं में समस्या को हल करने की विधि का विस्तृत ब्यौरा दिया जाता है। इस प्रकार की भाषाओं में इस तथ्य पर ध्यान दिया जाता है कि समस्या का समाधान किस प्रकार किया जाएगा।

    इनके उदाहरण हैं - BASIC,  C,  C++ आदि।

    (iii) उच्च स्तरीय भाषा (HHL) के गुण [Merits Of High Level Language (HLL)]-

    उच्च स्तरीय भाषा के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं -

    (i) HLL मैं प्रोग्रामिंग के लिए, अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग किया जाता हैं। इस प्रकार की भाषा को सीखना वह इसमें प्रोग्रामिंग करना सरल होता है।

    (ii) HLL मशीन आधारित नहीं होती है। अतः एक प्रकार की मशीन (Computer) के लिए बनाए गए प्रोग्राम को दूसरे प्रकार के कंप्यूटर पर सरलता से चलाया जा सकता हैं।

    (iii) अंग्रेजी के शब्दों के प्रयोग के कारण, इसमें लिखे प्रोग्राम में त्रुटि को खोजना है प्रोग्राम में परिवर्तन करना सरल होता है।

    (iv)HLL मैं यह आवश्यक नहीं होता है कि प्रोग्रामर को कंप्यूटर की आंतरिक संरचना का अच्छा ज्ञान हो।

    (iv) उच्च स्तरीय भाषाओं के उदाहरण (Example)- 

    HLL के कुछ मुख्य उदाहरण निम्नलिखित हैं -

    (i) फोर्ट्रान (FORTRAN)-

    यह  FORmula TRANslation का संक्षिप्त नाम है। यह कंप्यूटर के लिए बनाई गई पहली प्रोग्रामिंग भाषा थी, जिसका निर्माण आई•बी•एस• कॉर्पोरेशन (IBM Corporetion) ने सन।01957 में किया था। जिसकी निर्माता जॉन बेकस (Johm Backus) थे।

       इस भाषा का प्रयोग अभियांत्रिकी (Engineering) तथा वैज्ञानिक (Scientific) गणना के लिए होता है। इस भाषा की लाइब्रेरी (Library) में वैज्ञानिक गणना से संबंधित फंक्शन का संग्रह होता है। जिसके द्वारा बीजगणितीय समस्या का समाधान सरलता से किया जा सकता था। इस भाषा का समय समय पर विकास हो रहा है। इसके विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं; जैसे -

    FORTRAN  I                        (1957ई• में )

    FORTRAN  II                      ( 1958 ई• में )

    FORTRAN  III                     (1962 ई• में )

    FORTRAN  IV                     (1966 ई• में)

    FORTRAN  77                     (1977 ई• मे)     

    फॉरट्रॉन भाषा के गुण (Marits Of FARTRAN Language)-

    (a) यह कंप्यूटर के लिए बनाई गई पहली उच्चस्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा थी।

    (b) इसका प्रयोग विशेषता वैज्ञानिक व अभियांत्रिकी समस्याओं के समाधान के लिए होता था।

    (c) इसकी लाइब्रेरी में वैज्ञानिक व अभियांत्रिकी से संबंधित फंक्शन का संग्रह था, जिनका प्रयोग प्रोग्रामर अपनी आवश्यकता के अनुसार कर सकता था।

    (ii) कोबोल(COBAL)-

     Common Business Oriented Language का संक्षिप्त नाम COBAL है। इसका निर्माण यू.एस. इंडस्ट्री/गर्वमेंट कमेटी द्वारा सन 1960 में किया गया था। इसकी निर्माण के पीछे मुख्य उद्देश्य एक ऐसी भाषा का विकास करना था, जो व्यापार से संबंधित कार्यों की प्रोसेसिंग की सुविधा प्रदान कर सकें। जिस में प्रयोग किए जाने वाले शब्द अंग्रेजी के समान होते हैं; जैसे - SUBTRACT WITHDRAWALS FROM NEW BALANCES। कोबोल भाषा में बने किसी प्रोग्राम में निम्नलिखित 4 डिवीजन (Divisions) का होना अति आवश्यक है -

    What is computer programming language and its types?
    What is computer programming language and its types?

    (a)आइडेंटिफिकेशन डिवीजन (Identification Division)

    (b) एनवायरनमेंट डिवीजन (Environment Division)

    (c) डाटा डिवीजन (Data Division)

    (d) प्रोसीजर डिवीजन (Procedure Devision) ।

    कोबोल के गुण व अवगुण (Merits And Demerits Of COBOL)-

    (a) यह एक ऐसी पहेली HLL हैं, जो व्यापार से संबंधित कार्यों की प्रोसेसिंग की सुविधा करती है।

    (b) किस भाषा में लिखी प्रोग्राम का प्रबंधन करना, अन्य HLL की तुलना में, सरल होता है।

    (c) इस भाषा में हमें बृहत मात्रा में इनपुट व आउटपुट कर सकते हैं।

    (d) यह भाषा वैज्ञानिक व अभियांत्रिकी से संबंधित कार्यों की प्रोसेसिंग की सुविधा प्रदान नहीं करती है।

    (e) इस भाषा में रिजर्व शब्दों की संख्या बहुत अधिक (लगभग 300)होती है, जिन को स्मरण रखना कठिन होता है।

    (f) किस भाषा में लिखी निर्देश बड़े होते हैं, जिस कारण इनकी अनुवाद में अत्यधिक समय लगता है।

    (iii) पास्कल (Pascal)-

    इस भाषा का विकास, स्वीटजरलैंड के फेडरल इंस्टिट्यट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रो निकोलॉस विर्थ (Nikolaus Whirth) द्वारा सन 1970 में किया गया। इसका नाम पास्कल (Pascal) 17 वी दसवीं के फ्रांसीसी गणितज्ञ, दार्शनिक वह अविष्कारक ब्लेज पास्कल (Blaise Pascal) के नाम पर रखा गया, जिन्होंने पहले मेकेनिकल केलकुलेटर का निर्माण किया था। भाषा का प्रयोग वैज्ञानिक व व्यापारिक दोनों प्रकार की एप्लीकेशंस के लिए किया जा सकता था। यह भाषा प्रोग्रामर को तर्क के द्वारा समस्या हल करने पर बल देती है।

    पास्कल भाषा के गुण (Merits Of Pascal Language)-

    (a)यह ऐसी पहली HLL थी जो व्यापारिक व वैज्ञानिक दोनों प्रकार के एप्लीकेशन के लिए प्रयुक्त की जा सकती थी।

    (b) यह ब्लॉक स्ट्रक्चर्ड भाषा थी।

    (c)इस भाषा में मॉड्यूलर प्रोग्रामिंग संभव थी।

    (d) इस भाषा का कंपाइलर छोटे कंप्यूटर के लिए अत्यधिक उपयोगी था।

    (iv) बेसिक (BASIC)-

    Beginner's All Purpose Symbolic Instruction  Code का संक्षिप्त नाम बेसिक (BASIC) है। इसका निर्माण दो अमेरिकी नागरिकों प्रो•जे•जी•केमेंग (J.G Kemeng) तथा थॉम कर्ट्ज (Thomas Curtz) द्वारा अमेरिका के डर्टमाउथज कॉलेज में सन 1964 मैं गया किया था। इस भाषा के निर्माण का मुख्य उद्देश्य, ऐसी भाषा के निर्माण से था, क्यों एक प्रारंभिक प्रोग्रामर के किसी प्रोग्रामिंग की सुविधा प्रदान कर सकें। इस भाषा में लिखे प्रोग्राम को मशीनी भाषा में परिवर्तित करने के लिए कंपाइलर व इंटरप्रिंटर दोनों अनुवादक उपलब्ध है। इस भाषा के द्वारा, हम डाटा फाइल हैंडलिंग, ग्राफिक, ध्वनि, चित्रों व खेल आदि का निर्माण कर सकते हैं वर्तमान में बेसिक के विभिन्न प्रकार के संस्करण उपलब्ध हैं: जैसे - MS - BASIC,Q - BASIC, GW - BASIC आदि। 

    Read more: कंप्यूटर सॉफ्टवेयर क्या होते है

    बेसिक भाषा के गुण (Merits Of BASIC Language)-

    (a) यह अत्यधिक प्रयोग में आने वाली भाषा है।

     (b) इस भाषा के निर्देश अंग्रेजी वाक्य के समान होते हैं, जिनके कारण, इनको समझना और पढ़ना सरल होता है।

    (c)इसमें त्रुटियों को सरलता से खोजा जा सकता है।

    (d)इसके द्वारा ग्राफिक, खेल, व ध्वनि पर सरलता से कार्य किया जा सकता है।

    (v) अल्गोल (ALGOL)-

    यह ALGOrithmic Language का संक्षिप्त नाम है। इसका विकास सन 1958 में, एक इंटरनेशनल कमेटी द्वारा दिया गया था। यह भाषा, वैज्ञानिक तथा अभियांत्रिकी संबंधी कार्य के लिए प्रयोग में लाई जाती है। यह भाषा, अपने कुछ गुणों के आधार पर फोर्ट्रेन (FORTRAN) से मिलती जुलती है। । यह भाषा मॉड्यूलर प्रोग्रामिंग की सुविधा प्रदान करती है; अतः इस भाषा का प्रयोग स्ट्रक्चर्ड प्रोग्रामिंग के लिए किया जाता है।

    अल्गोल के गुड (Merits Of ALGOL)-

    (a) यह भाषा अपने विभिन्न गुणों के फोर्ट्रेन (FORTRAN) भाषा के समान है।

    (b)  यह भाषा यूरोप आदि देशों में अत्यधिक लोकप्रिय है।

    (c) यह स्ट्रक्चर वह मॉडलर प्रोग्रामिंग की सुविधा प्रदान करती है।

    (vi) ' सी ' भाषा ( ' C ' Language)-

    यह मध्यम स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा है; क्योंकि यह प्रोग्रामर को निम्न स्तर पर सीधे मेमोरी पर प्रोग्रामिंग करने के साथ-साथ उच्च स्तर में भी प्रोग्रामिंग करने की सुविधा प्रदान करती है। इस भाषा का विकास सन 1972 में, डेनिस रिचि द्वारा किया गया था। यह भाषा असेंबली भाषा में प्रोग्रामिंग की सुविधा प्रदान करती है। यह भाषा मॉड्यूलर (Modular) व स्ट्रक्चर्ड (Strured) प्रोग्रामिंग की सुविधा प्रदान करती है। इस भाषा में, समस्या को, छोटे-छोटे टास्कस (Tasks) में तोड़ दिया जाता है तथा प्रत्येक टास्क (Task) के लिए फंक्शन का प्रयोग किया जाता है, जिसको जोड़ने पर समस्या का समाधान होता है।

       

    What is computer programming language and its types?
    सी ' भाषा ( ' C ' Language)

      यह भाषा ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे जटिल प्रोग्राम को बनाने की सुविधा भी प्रदान करती है। यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का निर्माण भी, इसी भाषा में किया गया था। 

    ' सी ' भाषा के गुण (Merits Of 'C' Language)-

    (a) 'सी' भाषा के द्वारा निम्न स्तर तथा उच्च स्तर दोनों प्रकार की प्रोग्रामिंग संभव है; अतः इसे मध्यम स्तरीय भाषा कहा जाता है।

    (b)  यह भाषा Pointer  (मेमोरी एड्रेस) पर कार्य करने की सुविधा प्रदान करती है।

    (c)  यह भाषा मॉड्यूलर (Modulat) व  स्ट्रक्चर्ड (Structured) प्रोग्रामिंग की सुविधा प्रदान करती है।

    (vii) सी++ भाषा (C++ Language)-

    यह एक ऑब्जेक्ट आधारित प्रोग्रामिंग भाषा (Object Oriented Programming Language) है। इस भाषा का विकास सन 1980 में, जार्न स्ट्राउस्टप (Bjarne Stroustrup) द्वारा बेल प्रयोगशाला (Bell Language) में किया गया था। इस भाषा को  'सी' भाषा का नवीन संस्करण माना जाता है। इसमें 'सी' भाषा के तो समस्त गुण हैं ही, साथ ही साथ कुछ अन्य गुणों; जैसे - क्लासेज Classes), ऑपरेटर ओवरलोडिंग(Operator Overloading), इन्हेरिटेंस (inheritance) आदि; का समावेश भी किया गया है।

    C++ भाषा के गुण (Merits Of C++ Language)-

    What is computer programming language and its types?
    C++


    (a) यह ऑब्जेक्ट आधारित प्रोग्रामिंग भाषा है।

     (b) इस भाषा में 'सी' भाषा के तो समस्त गुण है ही, साथ ही साथ इसमें कुछ अन्य गुणों का समावेश भी किया गया है। इस कारण, यह एक अत्यंत उपयोगी भाषा मानी जाती है।

    3. चतुर्थ पीढ़ी भाषा 4GL( Fourth Generation Language)-

    चतुर्थ पीढ़ी भाषा, तृतीय पीढ़ी भाषा की अपेक्षाकृत उपयोग करना आसान है। सामान्यतः चतुर्थ पीढ़ी भाषा तृतीय पीढ़ी भाषा के समान टेक्स्ट वातावरण का उपयोग करते हैं या फिर विजुअल वातावरण का प्रयोग करते हैं। टेक्स्ट वातावरण में प्रोग्रामर अंग्रेजी में बने शब्दों का प्रयोग स्त्रोत (Source) कोड के निर्माण में करते हैं। सामान्यतः चतुर्थ पीढ़ी भाषा में एक कथन तृतीय पीढ़ी भाषा में लिखे गए कई लाइनों के समान कार्य को संपन्न कराता है।

           चतुर्थ पीढ़ी भाषा के विजुअल वातावरण में, प्रोग्रामर टूलबार का प्रयोग कर कई आइटमो में जैसे बटन, लेबल तथा टेक्सट बॉक्स को ड्रैग और ड्रॉप कर किसी एप्लीकेशन की विजुअल परिभाषा निर्मित करते हैं। एक बार जब प्रोग्रामर प्रोग्राम का प्रकटन (Appearance) डिजाइन कर चुके होते हैं, वह स्क्रीन पर ऑब्जेक्ट को कई कार्य (Actions) असाइन कर सकते हैं।

          अधिकतर चतुर्थ पीढ़ी भाषा प्रोग्राम को कार्य करने के लिएइंटीग्रेटेड डेवलपमेंट वातावरण (Integrated Development Environment) उपलब्ध कराते हैं। डेवलपमेंट वातावरण प्रोग्रामर को किसी एक प्रोग्राम में एप्लीकेशन विकास के लिए आवश्यक सभी प्रकार के टूल प्रदान करते हैं। उनके एप्लीकेशन के लिए कंपाइलर कथा रनटाइम सपोर्ट (Run time Support) भी उपलब्ध होते हैं। माइक्रोसॉफ्ट विजुअल स्टूडियो तथा सन जावा स्टूडियो दो व्यवसायिक इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट वातावरण है।

    चतुर्थ पीढ़ी भाषाओं में ये नाम सम्मिलित हैं -

    (i) डॉट नेट (.Net)-

    डॉट नेट माइक्रोसॉफ्ट के प्रोग्रामिंग क्षेत्र में बिल्कुल नवीनतम कार्यों में से एक है यह कई प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे विजुअल बेसिक; सी++, जे हैश (J #) तथा सी हैश (C#) को मिलाकर एक इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट वातावरण का निर्माण करता है। डॉट नेट को केवल विकास कर्ताओं की भाषा कहना गलत नहीं होगा। डॉट नेट का प्रयोग कर विकास करता विंडोज तथा वर्ल्ड वाइड वेब के लिए एक प्रोग्राम लिख सकते हैं। डॉट नेट इन सभी बातोंवर्णों के ऑथरिंग प्रोग्रामो (Authoring Programs) को सरल बनाता है।

    (ii) ऑथरिंग वातावरण (Authoring Environments)-

    ऑथरिंग वातावरण मल्टीमीडिया अनुप्रयोगों, कंप्यूटर आधारित प्रशिक्षण प्रोग्राम, वेबपेज इत्यादि के लिए विशेष उद्देश्य प्रोग्रामिंग टूल है। इस  ऑथरिंग वातावरण का एक उदाहरण माइक्रो मीडिया डायरेक्टर है जो लिग्नो स्क्रिप्टिंग भाषा (Lingo Scriping Language) का प्रयोग करता है। आप इसका प्रयोग कर संगीत क्लिप्स (Clips), टेक्स्ट, एनीमेशन, ग्राफिक्स इत्यादि को मिलाकर मल्टीमीडिया शीर्षको (Titles) का निर्माण कर सकते हैं। जैसाकि अन्य विजुअल डेवलपमेंट वातावरण में, ज्यादातर कोर्ट स्वत: ही लिखे जाते हैं। किंतु अधिकतर सख्त (Robust) ऑथरिग वातावरण भी उनके अपनी ही भाषा का प्रयोग करते हैं, जिन्हें स्क्रिप्टिंग भाषा कहा जाता है। जो कि अंतिम उत्पाद पर अतिरिक्त नियंत्रण के लिए टूल प्रदान करते हैं। वर्ल्ड वाइड वेब पैजो के लिए प्रयुक्त होने वाले प्रोग्राम दूसरी श्रेणी के पूर्व मे आते हैं। इस तरह के प्रोग्राम में माइक्रोसॉफ्ट फ्रंट पेज (Microsoft Front Page), नेटस्कैप विजुअल जावास्क्रिप्ट (Netscape Visual Java Script) तथा नेटोब्जेक्ट्स फ्यूजन (NetObject Fusion) हैं।

    (iii) सन स्टूडियो वन (Sun Studio One)-

    सन स्टूडियो वन जावा कथा स्विंग एपलेट्स का वीडियो एडिटर हैं एपलेट ऐसा प्रोग्राम है जो किसी वेबपेज के अंदर क्रियान्वित होता है स्टूडियो वन पूर्ण इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट वातावरण प्रदान करता है तथा साथ ही है फ्लैट निर्माण जैसे सामान्य कार्यों को स्वचालित करने हेतु कई बाजार प्रदान करता है स्टूडियो वन के साथ एक विशेष बात यह भी है कि यह जावा के निर्माण सनमाइक्रो सिस्टम्स के द्वारा ही विकसित किए गए हैं चतुर्थ पीढ़ी भाषा में इस दशक की कई अन्य भाषा जो निम्नलिखित है शामिल हैं किंतु निम्नलिखित भाषाओं के बारे में कंप्यूटर विशेषज्ञों में मतभेद भी है कुछ विशेषज्ञ इसे चतुर्थ पीढ़ी भाषा का ना जानकर पंचम पीढ़ी भाषा की श्रेणी में सामान्यता देना पसंद करते हैं।

     इन भाषाओं की सूची निम्न प्रकार है- 

    हाइपरटेक्स्ट मार्कअप भाषा (Hypertext Markup Language)

    बितान्य मार्कअप भाषा (Extensible Markup Language)

    बितान्य हाइपरटेक्स्ट मार्कअप भाषा (Extensible Hypertext Markup Language)

    बितान्य स्टाइल शीट भाषा (Extensible Style Sheet Language)

    बितान्य मार्कअप भाषा मोबाइल प्रोफाइल (Extensible Markup Language Mobile Profile)

    ड्रीमवेवर (Dreamweaver)

    फ्लैश (Flash)

    डायरेक्टर  (Director)

    जावास्क्रिप्ट ( javaScript)

    जावा (Java )-

    जावा भाषा का विकास सनमाइक्रो सिस्टम्स ने 1990 के दशक में किया था। एक भाषा का प्रयोग मुख्य रूप से वेब प्रोग्रामिंग में वेब पेज के लिए एफ्लैट (Applets) निर्माण में किया जाता है। अप्लेट्स छोटे प्रोग्रामों को कहा जाता है। जावा क्रियान्वयन के लिए स्वचालित कोड लिखे जाते हैं। अतः यह किसी विशेष प्रकार के प्लेटफॉर्म (Platform) के लिए बाध्य नहीं होते हैं।

    हाइपरटेक्स्ट मार्कअप भाषा  (Hypertext Markup  Language)-

    हाइपरटेक्स्ट मार्कअप भाषा, संक्षिप्त रूप में एच• टी• एम• एल•के नाम से जानी जाती है। इस भाषा का प्रयोग मुख्यतः वर्ल्ड वाइड वेब (Word Wide Web) के लिए वेव डाक्यूमेंट्स बनाने में होता है। इस भाषा का प्रयोग डायबिटीज में टैग्स बनाने, ऐसी सुंदरता के साथ फॉर्मेट करने तथा बिभिन हाइपरलिंक्स को सम्मिलित करने के लिए किया जाता हैं।

    एक टिप्पणी भेजें

    0 टिप्पणियाँ