कंप्यूटर में संचार प्रक्रिया को समझाए Communication Process In Computer, Components Of Communication, And Types Of Communication
संचार का मुख्य उद्देश्य डेटा एवं सूचनाओं का आदान प्रदान करना होता है। डेटा संचार से तात्पर्य दो विभिन्न या समान डिवाइसों (Devices) के मध्य डेटा को आदान-प्रदान से है। डेटा संचार के प्रभाव को तीन मुख्य विशेषताओं द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है -
| What is communication its process and types? |
1. वितरण (Delivery) -
वितरण से तात्पर्य डेटा को एक जगह से दूसरी जगह प्राप्त कराने से है।
2. विशुद्धता (Accuracy) -
क्या गुड डेटा की गुणवत्ता या डेटा के सही होने को दर्शाता है।
3. सटीक समय (Timeliness) -
यह गुण डेटा के निश्चित समय में डिलीवर होने को दर्शाता हैं।
संचार के अवयव Components Of Communication -
किसी संचार प्रक्रिया में 5 घटक जुड़े होते हैं -
1.संदेश (Massage)-
संदेश कम्युनिकेशन प्रक्रिया में प्रयुक्त सूचनाओं या डेटा का समूह होता है।
2. प्रेषक (Sender)-
प्रेषक अथवा स्त्रोत व्यक्ति प्रेषक हेतु बेटा प्रदान करता है। यह डेटा कोई फाइल, चित्र, धोनी अथवा कोई चलचित्र हो सकता है।
3. माध्यम (Medium)-
संचरण माध्यम को संतरण चैनल (Communication Channel) भी कहते हैं। यह डेटा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर संचारित (Transmit) करता है।
4. प्राप्तकर्ता (Receiver)-
स्त्रोत व्यक्ति (Sender) द्वारा प्रदत डेटा को प्राप्त करने वाले व्यक्ति को प्राप्तकर्ता (Receiver) कहते हैं।
5. प्रोटोकॉल (Protocol)-
प्रोटोकॉल वह प्रणाली है, जो संपूर्ण संसार मॉडल की विविध डिवाइसेज के मध्य सामंजस्य स्थापित करती है और प्रक्रिया के उपरांत संबंध विच्छेद भी करती हैं। डेटा के प्रेषण के बाद प्राप्तकर्ता प्रेषित डेटा स्वीकार कर लेता है, तो प्रोटोकॉल अंत में संचरण को समाप्त भी कर देता है जिससे अगली संचरण प्रक्रिया हो सके। संचार उपकरणों की भिन्न भिन्न निर्माता कंपनियां होती हैं, जिससे किसी नेटवर्क पर अनेक निर्माताओं की डिवाइसेज हो सकती है। अतः सामान्य आसमान संकेतों को संचार डिवाइस (Computer) स्वीकार नहीं कर पाती है। इस समस्या के समाधान के लिए संचार उपकरणों को की निर्माता कंपनियों में सामंजस्य स्थापित करते हुए एक सर्वमान्य संचार तकनीक के मानक (Standard) निर्धारित किए गए हैं। जिन्हें संचार प्रोटोकॉल कहते हैं। इन प्रोटोकॉल को आधार मानते हुए ही कंप्यूटर नेटवर्क स्थापित किए जाते हैं।
संचार के प्रकार Types Of Communication -
संचार माध्यम को डांटा प्रेषण की दिशा के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। संचार माध्यम में डाटा का संवहन एक बार में एक ही दिशा में है अथवा दोनों दिशाओं में होता है, इस आधार पर उसे तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है -
1.सिंपलेक्स (Simplex)-
संचरण की इस अवस्था में यातायात संकेत सदैव एक दिशा में प्रेरित होते हैं। उदाहरणार्थ, कंप्यूटर से संयोजित की-बोर्ड के द्वारा डाटा केवल की-बोर्ड से कंप्यूटर की ओर प्रेषित होता है। इसलिए डाटा के (Two -Way) द्वि- मार्गी संचरण के लिए इस प्रकार की 2 लाइनें की आवश्यकता होती है। यद्यपि सिंपलेक्स लाइन सस्ती होती है, लेकिन यह कंप्यूटर आधारित संचार में अनुप्रयोग होती है कंप्यूटर आधारित संचार में द्वि- मार्गी भी संचरण की आवश्यकता अधिक होती है।
यहां तक कि प्रिंटर जैसी डिवाइसेज में भी, जिनमें डाटा प्राय: एक ही दिशा में संचालित होता है, यह अनुप्रयोग तो रहती है।
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2.अर्ध डुप्लेक्स (Half Duplex)-
इस अवस्था में संचरण तो दोनों दिशाओं में संभव है, लेकिन एक समय में एक ही दिशा में संचरण होता है। संचरण की व्यवस्था वैकल्पिक द्वि- मार्गी(Two-Way Alterntive) भी कहलाती है। उदाहरणार्थ, एक हार्ड डिस्क से डाटा का आदान-पदान अर्ध डुप्लेक्स अवस्था में होता है। जब हार्ड डिस्क पर डाटा संग्रहित (Save) किया जाता है तो उस समय डाटा को हार्ड डिस्क से पढ़ा नहीं जा सकता है, और जब डाटा हार्ड डिस्क से पढ़ा जा रहा हो तो संग्रहित नहीं किया जा सकता है।
3. पूर्ण डुप्लेक्स (Full Duplex)-
इस अवस्था में एक समय में डेटा का संचरण दोनों दिशाओं में संभव होता है। विशेष उद्देश्य की टेलीफोन लाइनों में यह सुविधा होती है।
कंप्यूटर से कंप्यूटर के हार्डवेयर संचार में पूर्ण डुप्लेक्स अवस्था का उपयोग होता है। इस अवस्था के संचार में वृहद मात्रा में डाटा का संचार एक ही समय में दोनों दिशाओं में होता है।

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